जेवर एयरपोर्ट के लिए सहमति बिना भूमि अधिग्रहण पर विचार

राब्यू, लखनऊ : प्रदेश सरकार अब किसानों की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण पर भी विचार कर रही है। संबंधित प्रस्ताव पर न्याय विभाग से राय मांगी जा रही है। दरअसल, भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 की धारा-2 (1) के अनुसार सरकार को स्वयं के उपयोग, अधिकार और नियंत्रण एवं पब्लिक सेक्टर के उपक्रम के लिए भूमि जुटाने में सहमति की आवश्यकता नहीं है।

अधिनियम की इसी धारा के आधार पर सरकार लोक परिवहन के उद्देश्य से हवाई सेवाओं के संचालन के लिए भूमि, लोक प्रयोजन के तहत एयरपोर्ट विकसित करने के लिए लेने जा रही है। नागरिक उड्डयन विभाग के निदेशक एवं विशेष सचिव सूर्य पाल गंगवार ने बताया कि संबंधित प्रस्ताव यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने दिया है। भूमि अध्याप्ति के निदेशक ने भी इस पर सहमति प्रकट की है। हालांकि, यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार का कहना है कि भले ही कानून में बिना सहमति के भूमि लेने की व्यवस्था है लेकिन, मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसानों की सहमति से ही जमीन ली जाए। ऐसे में किसानों की मर्जी के बिना जमीन लेने का सवाल ही नहीं उठता है। माना जा रहा है कि अगले वर्ष लोकसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश सरकार किसानों को कतई नाराज नहीं करना चाहती है।

जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा: जेवर एयरपोर्ट के लिए दो गांवों को अधिग्रहण से मुक्त कर दिया गया है। यह दोनों गांव आंशिक रूप से एयरपोर्ट की सीमा में आ रहे थे। अधिग्रहण से मुक्त होने का सीधा फायदा 452 परिवार को मिलेगा। उन्हें विस्थापित नहीं किया जाएगा। एक और गांव में अधिग्रहण से बाहर किया जा सकता है। गांवों को अधिग्रहण से मुक्त करने का फैसला शुक्रवार को गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में हुई विशेषज्ञ समूह की बैठक में लिया गया है। जेवर एयरपोर्ट के पहले चरण के लिए आठ गांवों की 1441 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजा गया था। इन गांवों में रामनेर, मुकीमपुर सिवारा, बनबारीवास, रोही, किशोरपुर, दयानतपुर, परोही, रन्हेरा शामिल हैं। जमीन अधिग्रहण का इन गांवों के ग्रामीणों के जीवन पर सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव जानने के लिए जीबीयू ने सोशल इंपेक्ट ऐससमेंट (एसआइए) किया था। एसआइए के मूल्यांकन के लिए शुक्रवार को विशेषज्ञ समूह की दूसरी बैठक हुई थी। समूह ने उत्तर प्रदेश भू अर्जन नियमावली 2016 के अनुसार एयरपोर्ट के लिए कम से कम जमीन का अधिग्रहण एवं परिवार के विस्थापन को मानते हुए रामनेर एवं मुकीमपुर सिवारा को अधिग्रहण से मुक्त कर दिया। दोनों गांवों की 250 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होना था। इस वजह से मुकीमपुर सिवारा के 452 परिवार को विस्थापित होना पड़ता।

Courtesy: https://epaper.jagran.com/ePaperArticle/14-aug-2018-edition-Delhi-City-page_2-1101-5798-4.html